दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि

हमारे भारत में बहुत सारे पर्व-त्यौहार मनाये जाते हैं, जिसमें कि मुख्य रूप होली, दुर्गा पूजा, छठ, दिवाली

बड़े ही धूम-धाम से मनाये जाते हैं |दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि हमारा भारत देश के जैसा कोई देश नहीं है,

क्यूंकि इस देश में कई सारे धर्म जैसे हिन्दू, मुस्लिम, सिख और इसाई धर्म के लोग रहते हैं |

नवरात्रि पूजा विधि Navratri Puja Vidhi

सभी धर्म के लोगोंके भगवान भी अलग-अलग हैं | आप देखते भी होंगे उनका कपड़े पहनने, खाने-पीने और बोलने

का ढंग भी अलग-अलग है |

अगर बात करे हिन्दू धर्म कि तो हमारे धर्म में दुर्गा पूजा बड़े ही नियम धर्म और बड़े ही धूम-धाम

से मनाया जाता है | अभी आप आगे जानेगे कि नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि कैसे कि जाती

है | कौन-कौन से माँ कि पूजा किस-किस दिन कि जाती है ? माँ को कौन-कौन से रंग के भोग, फूल चढ़ाना चाहिए |

हमें किस देवी माँ को कौन से रंग के कपड़े चढ़ाना चाहिए | माँ दुर्गा को अरहुल का पुष्प

अधिक प्रिय है इसलिए इन्हें इसकी माला बनाकर चढ़ानी चाहिए | जानते हैं, कि देवी माँ के

नव रूप हैं, तो हम जानेगे कि नवरात्रि पूजा विधि के बारे में कि किस तरह से माँ

के नव रूपों कि पूजा कैसे की जाती है |

नवरात्रि पूजा विधि 2020

किसी भी पूजा करने से पहले हमें कलश स्थापना कि पूजा करनी होती है | दुर्गा माँ कि कलश स्थापना

करने के लिए हमें कुछ जरुरी सामाग्रियों का इन्तेजाम करना होता है |दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधिजैसे कि गंगाजल, कलश,

आम का पल्लव ( पत्ते ),लाल कपड़ा, पान के पत्ते, कशैली, दिया, रोरी और अक्षत आप अपने अनुसार

दक्षिणा भी रख दे |नवरात्रि पूजा करने की विधि अगर आप साधारण रूप से माँ कि पूजा कर रहे हैं

तो आप ऐसे कलश स्थापनकि पूजा घर में ही कर सकते हैं | अगर आप घर में

रहकर भव्य रूप से पूजा करना चाहते हैं, नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि

तो आप पंडित के द्वारा कलश स्थापना कि पूजा कर सकते हैं | आप माता की पूजा घर में करेंगे तो

माता आपके ऊपर हमेशा कृपा बनाये रखेंगी |

दुर्गा माँ कि पूजा वर्ष में दो बार मनाई जाती है | चैत्र मास में जब गर्मी पड़ने वाली होती

है और आश्विन मास में जब ठण्ड आने वाली होती है | हमें माँ दुर्गा कि पूजा शान्ति रूप से

करनी चहिए |

नवरात्रि पूजन विधि मंत्र

सबसे पहले आप गौरी-गणेश कि पूजा करे | अपने मन में श्री गणेश का ध्यान रखते हुए

पूजा की शुरुआत करें, और अपने मन में ये ध्यान करे की श्री गणेश हमारी पूजा में रिधि -सिद्धि प्रदान करें|

अब आप नवग्रहों की स्थापना करें |दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि

नवग्रहों की स्थापना के लिए आप रंगा हुआ पीले चावल या रेत का इस्तेमाल कर सकते है |

पूजा में मन्त्रों का उच्चारण बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है, इससे हमारे शरीर में उर्जा का संचार होता है,

और नकारात्मक शक्तियों विनाश होता है |

नवरात्रि पूजन विधि मंत्र कैसे करे ?

जैसा की आप जानते है नवरात्री में माँ दुर्गा के नौ रूपों की

पूजा होती है हर देवी के अलग अलग महत्व

होते है, हर एक देवी के आवाहन में मंत्रो का उच्चार होता है

तो चलिए जानते है इन मंत्रो के बारे में, दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि

  1. माँ शैलपुत्री:-

नवरात्री के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है, इन्हें माँ दुर्गा का प्रथम रूप कहा जाता है |

माँ के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल धारण की हुई है |पर्वतों के राजा

हिमालय में पुत्री के रूप में जनम लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री हुआ | नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि इनकी पूजा करते

समय आप “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः ” का उच्चारण कर सकते है | माता शैलपुत्री पूजा करते समय

आप यह ध्यान मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

नवरात्री पूजन विधि in Hindi

2. माँ ब्रह्मचारिणी :-

माँ दुर्गा का यह दूसरा रूप है जिसमे माता के दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि दाहिने हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल है |

ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ होता है तप का आचरण करनेवाली है | जिसमे ब्रह्म का अर्थ है तपस्या

और चारिणी का अर्थ है आचरण करनेवाली |दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि इनकी पूजा करने से मानव में तप, सदाचार तथा त्याग

की वृद्धि होती है | माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय आप यह ध्यान मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
 देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

3. माँ चंद्रघंटा :-

माता दुर्गा के तीसरी दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना की जाती है | माता चंद्रघंटा का स्वरुप

अतिशांतिदायक और कल्याणकारी होता है | इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है जिससे

इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा |इनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है |नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि यह माता सिंह पर सवार

करती है | हमें अपने पुरे मन , कर्म और वचन से माता की पूजा करनी चाहिए जिससे की हमारी मानव

जाती का कल्याण हो |इनकी आराधना करने से हम सभी सांसारिक कष्टों से मुक्ति पा सकते है |

माता चंद्रघंटा की पूजा करते समय आप यह ध्यान मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

दुर्गा माता की पूजा विधि

4. माँ कुष्मांडा :-

नौ देवियों में चौथे स्थान पे माँ कुष्मांडा का स्थान आता है | दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि अपने मुख पर मंद हलकी मुस्कान

के द्वारा समस्त ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ा | माँ की उपासना

से मनुष्य कल्याण का पात्र होता है इसलिए हमें माँ की उपासना सच्चे मन से करनी चाहिए |

माता कुष्मांडा की आराधना करने से माता मनुष्य को समृधि , सुख और उन्नति देती है |इसलिए मनुष्य

को अपनी उन्नति के लिए माता कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए|नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि माता कुष्मांडा की पूजा करते

समय आप यह ध्यान मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तुमे।।

नौदुर्गा की पूजा कैसे करे ?

5. माँ स्कंदमाता :-

नवरात्री के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की आराधना की जाती है | यह देवी भगवन स्कन्द यानि

कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है |

इनका रंग शुभ्र है | माता कमल के आसन पर बैठी है | इन्हें पद्मासन देवी के नाम से भी जाना

जाता है | माता स्कंदमाता का वाहन भी सिंह है | कमल के असं पर अवस्थित माता समस्त

संसार का कल्याण करती है |दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि

माँ स्कंदमाता की पूजा करते समय आप यह ध्यान

मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि

6. माँ कात्यायनी :-

मा दुर्गा के नौ रूपों में माता कात्यायनी का स्थान छठा है | महर्षि कात्यायन द्वारा कठिन तपस्या

के कारण जब माता प्रसन्न हुई तो माँ कात्यायनी देवी महर्षि के यहाँ अपनी इच्छानुसार पुत्री के रूप

में पैदा हुई | जिसके करना इनका नाम माता कात्यायनी पड़ा |दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधिकठोर तप करने से माँ अपने भक्तो

पे प्रसन्न होती है तथा अनंत फलदायिनी होती है |माँ कात्यायनी की पूजा करते समय आप यह ध्यान

मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

7. माँ कालरात्रि :-

नवरात्री के सातवे दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है | इनका स्वरुप भयानक है किन्तु

यह हमेशा अपने भाटों को शुभ फल देनेवाली होती है |नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि इन्हें सुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है |

यह दिन सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है | माता कालरात्रि की पूजा के दिन बहुत सारे पंडालों तथा

मंदिरों में माँ दुर्गा के पट खुलने लगते है | माँ कालरात्रि संसार के समस्त दुष्टो का नाश करती है और

सारे संसार में कल्याणकरी आशीर्वाद प्रदान करती है | माँ कालरात्रि की पूजा करते समय आप

यह ध्यान मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

एक वेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरणी।।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयड्करी।।

8. माँ महागौरी :-

दुर्गा पूजा के आठवे दिन माँ महागौरी की पूजा होती है | इनकी आराधना से मनुष्य के सारे दुःख

दूर होते है | नवरात्री के आठवे दिन महागौरी की पूजा पुरे विधि विधान से की जाती है | इस दिन

मंदिरों में माता को नारियल चढ़ाया जाता है और भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए माता

को प्रसन्न करते है | माँ महागौरी की पूजा करते समय आप यह ध्यान मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

श्वेते वृषे समरूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

नवरात्री पूजन विधि 2020

9. माँ सिधिदात्री :-

देवी दुर्गा की पूजा के नौवें दिन माता सिधिदात्री की पूजा की जाती है | माता के नाम से ही स्पष्ट

होता है कि ये सिद्धि देनेवाली माता है तथा यह अपने सच्चे भक्तों को सुख, समृद्धि प्रदान करती है |

नौ दुर्गा में माता सिद्धिदात्री का स्थान अंतिम है | माता को खीर , हलवा, पूरी का भोग लगाने से

माता अति प्रसन्न होती है तथा अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाये रखती है |

दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधिमाँ सिद्धिदात्री की

पूजा करते समय आप यह ध्यान मंत्र का उच्चारण कर सकते है :

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

इस प्रकार से आप माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करके आप और अपने परिवार का कल्याण कर सकते है |

दुर्गा पूजा में इन्ही नौ देवियों का अत्यंत महत्व होता है |

नवरात्रि पूजन सामग्री

माँ दुर्गा जी कि नवरात्रि पूजन सामग्री के लिए हमें इन चीजों कि आवशयकता पड़ेगी | माँ दुर्गा कि सुन्दर

मूर्ति या फोटो, कपूर, रोली, सक्कर, घी, शहद, अगरबत्ती, मोली, चौकी (माता के आसन के लिए ), आसन स्वयं के लिए,

कंगन, चूड़ी या लहठी, बिंदी, कंघी, एनक, अलता, लाल कपड़ा, पीला कपड़ा, माल, फूल, पान के पत्ते, इलायची, लौंग, नारियल,

भोग के लिए मीठा जैसे पेडा, खीर, हलवा, पूरी काजू, किसमिस, बताशा बादाम, दूध, दही, गेहूं का नवरात्रि पूजा विधि

आटा, इत्यादि का भोग लगाईये | नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि नवग्रह के पूजन के लिए तरह-तरह के फूलों कि जरुरत पड़ती है |

इसके अलावा आप अन्य सामग्री अपने अनुसार रख सकते हैं |

नौ देवियों के भोग लगायें , होंगी सभी मनोकामना पूरी |
माता दुर्गा के विभिन्न रूपों में अलग-अलग तरह के भोग लगाने से माता प्रसन्न होती है तथा माँ

अपने भक्तो की सभी मनोकामना पूर्ण करती है | अगर आप देवी दुर्गा की पूजा करते है तो

कौन-कौन से भोग लगाने चाहिए यह आपका जानना बहुत ही जरूरी है | आपके मन में सवाल

होगा की कौन सा भोग किस दिन माता को लगाना चाहिए जिससे की आपके ऊपर माता

की कृपा हमेशा बनी रहे तो चलिए जानते है :

प्रथमा:-

माँ दुर्गा के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है | माता को सफ़ेद रंग या स्वेत रंग अत्यंत

प्रिय है | माता शैलपुत्री को सफ़ेद रंग के भोग लगाये और स्वेत रंग के पुष्प

चढ़ाएं इससे माता बहुत ही प्रसन्न होती है |

द्वितीया :-

देवी दुर्गा की पूजा के दुसरे दिन माँ बह्मचारिणी की आराधना की जाती है | इनकी पूजा

करने से मनुष्य के जीवन में संयम और सदाचार बढ़ने लगता है | दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि

इस दिन माता ब्रह्मचारिणी

को शक्कर का भोग लगाये | इससे माता आपका सपरिवार कल्याण करेगी |

तृतीया :-

नवरात्री के तीसरे दिन माता माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है | इस दिन माँ की पूजा

करते समय घंटे बजने से अधिक प्रसन्न होती है तथा समस्त नकारात्मक शत्क्तियो का नाश

होता है | इस दिन माता को दूध से बनी चीजो जैसे पेडा, खीर और दूध से बनी मिठाइयों का

भोग लगाना अत्यंत शिभ्कारी माना जाता है |

नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि

चतुर्थी :-

दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा की जाती है | इस दिन माता को मैदे से

बने मल्पुवे का भोग लगाने माता अत्यंत पसंन होती है | भोग लगाने के बाद प्रसाद को

अपने समस्त परिवार में बांटे इससे बरक्कत होती है |

पंचमी :-

पंचमी यानि पांचवे दिन माता स्कंदमाता की आराधना की जाती है |

इस दिन माँ को पके केले का भोग लगाया जाता है जिससे माता आपके समस्त रोगों से छुटकारा

दिलाती है तथा अपने भक्तो पर कृपा बरसाए रहती है |

षष्ठी :-

यह दिन देवी दुर्गा की पुजा का छठा दिन होता है | इस दिन माता कात्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है |

इस दिन माँ को कद्दू अथवा लौकी और शहद का भोग लगाया जाता है |

यह भोग लगाने से माता अधिक प्रसन्न होती है |

सप्तमी :-

सप्तमी यानि सातवे दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है | माता कालरात्रि दुष्टों का संहार करनेवाली होती है

तथा अपने सच्चे भक्तो का कल्याण करती है |नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि

इस दिन माँ को गुड अथवा मिट्ठा से बने भोग लगाने माता अत्यंत प्रसन्न होती है, और

भक्त मनोवांछित फल को प्राप्त करते है |

अष्टमी के दिन कैसे पूजा करे ?

अष्टमी :-

माता दुर्गा पूजा के आठवे दिन अष्टमी की पूजा की जाती है | इस दिन माँ महागौरी की पूजा आराधना की जाती है |

महागौरी की सच्चे मन से पूजा करने से माता मनुष्य के सभी पापों का नाश करती है |

इस दिन माँ महागौरी को जलयुक्त नारियल का भोग लगाने से माता अधिक प्रसन्न होती है तथा

अपने भक्तो की सभी मनोकामनाओं को पूरा करती है |

नवमी :-

नवमी अर्थात नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा होती है | इस दिन माता को टिल के लाड्डो का भोग

लगाने से माता अपने भक्तो पर कृपा बनाये रखती है |

नौ दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि

इस दिन माता को खीर, हलवा और पूरी का

भोग भी लगा सकते है इससे माता आपके सभी कष्टों को दूर करती है |

स प्रकार माँ दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य अपने जीवन सफल बनता है तथा

उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है |

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निष्कर्ष :-

मुझे उम्मीद है मैंने इस ब्लॉग के माध्यम से दुर्गा पूजा करने की क्रिया विधि और नवरात्री सम्पुर्ण पूजन विधि

के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है और नवरात्रि पूजन विधि मंत्र के बारे में भी बताया है |

नवरात्री के दिन नवरात्रि पूजन सामग्री कौन- कौन से इस्तेमाल करना चाहिए इसके बारे

में भी जानकारी मिली है | अगर यह जानकारी अच्छी लगी तो अपने मित्रो और स्वजनों से शेयर करे |

और comment में बताये, यह जानकारी कैसी लगी ?

धन्यवाद…

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